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मौत के बाद लौटने वाली लड़की

मौत के बाद लौटने वाली लड़की
HORROR • SUPERNATURAL • MYSTERY

मौत के बाद लौटने वाली लड़की

कुछ लोग मौत के बाद चले जाते हैं... लेकिन हर कोई वापस नहीं आता।

⚠ HORROR STORY
यह एक काल्पनिक डरावनी कहानी है, जिसमें मृत्यु, आत्मा और अलौकिक घटनाओं का वर्णन किया गया है।

02:03 AM

रात के ठीक 2 बजकर 03 मिनट हुए थे। पूरे कमरे में अंधेरा था। सिर्फ मेज पर जल रही एक छोटी-सी मोमबत्ती की लौ बार-बार कांप रही थी। कमरे की दीवारों पर पुराने कागज चिपके हुए थे और फर्श पर कई किताबें खुली पड़ी थीं। कुछ किताबों के पन्नों पर अजीब निशान बने हुए थे।

लेकिन उन सबके बीच बैठे विवान की नजर सिर्फ एक तस्वीर पर थी। तस्वीर में एक लड़की मुस्कुरा रही थी। उसका नाम था काव्या—विवान की पत्नी। उसे मरे हुए सिर्फ दो दिन हुए थे।

लेकिन विवान को यकीन था कि काव्या अभी भी कहीं आसपास थी। उसने कांपते हाथों से तस्वीर उठाई और धीमी आवाज में कहा, "तुमने कहा था ना... मुझे कभी अकेला नहीं छोड़ोगी।" उसकी आंखों से आंसू गिरने लगे।

ट्रिंग... ट्रिंग...

टेबल पर रखा फोन अचानक बज उठा। विवान ने फोन की तरफ देखा और स्क्रीन पर जो नाम दिखाई दे रहा था, उसे देखकर उसके हाथ सुन्न पड़ गए।

INCOMING CALL
काव्या कॉलिंग...

विवान कुछ सेकंड तक फोन को देखता रहा। उसका दिमाग कह रहा था कि यह असंभव है। काव्या का फोन दुर्घटना के बाद पुलिस के पास था। फिर भी फोन लगातार बज रहा था।

उसने कांपते हाथों से कॉल उठा ली। "हेलो?"

दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक कोई आवाज नहीं आई। फिर बहुत धीमी सांसों की आवाज सुनाई दी। विवान ने घबराकर पूछा, "काव्या?"

एक धीमी फुसफुसाहट आई—"विवान..."

उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। "काव्या! तुम कहां हो?"

कुछ पल खामोशी रही। फिर आवाज आई—"मुझे ढूंढने मत आना।"

“मुझे ढूंढने मत आना।”

कॉल अचानक कट गई।

उसी समय कमरे के बाहर किसी के चलने की आवाज आई।

ठक... ठक... ठक...

विवान ने धीरे से सिर उठाया। आवाज उसके कमरे की तरफ आ रही थी। फिर उसके दरवाजे के बाहर कोई रुक गया। कुछ सेकंड तक बिल्कुल खामोशी रही।

फिर दरवाजे के दूसरी तरफ से एक आवाज आई—"विवान..."

वह काव्या की आवाज थी।

विवान कुर्सी से उठ गया। उसने दरवाजे के पास जाकर पूछा, "काव्या?" बाहर से कोई जवाब नहीं आया। फिर दरवाजे पर तीन बार दस्तक हुई।

ठक... ठक... ठक...

विवान ने दरवाजा खोलने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन तभी उसे काव्या की आखिरी बात याद आई—"मुझे ढूंढने मत आना।"

उसका हाथ वहीं रुक गया।

अचानक दरवाजे के नीचे से एक काली परछाईं दिखाई दी। वह किसी लड़की की परछाईं थी। लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि...

THE SHADOW

उस परछाईं के पैर गलत दिशा में थे।

परछाईं कुछ सेकंड वहीं खड़ी रही। फिर धीरे-धीरे पीछे हट गई और कदमों की आवाज सीढ़ियों से नीचे जाने लगी।

विवान ने पूरी रात दरवाजा नहीं खोला। सुबह तक वह उसी जगह बैठा रहा। उसे तब नहीं पता था कि यह सिर्फ शुरुआत थी।

काव्या की मौत के बाद...

उसके घर में कुछ वापस आ चुका था।

मौत के बाद लौटने वाली लड़की डरावनी कहानी

उस रात के बाद घर पहले जैसा नहीं रहा।

CHAPTER 02

मौत के बाद पहला सुराग

सुबह होते ही विवान सीधे अस्पताल पहुंचा। वहां उसने काव्या के बारे में जानकारी मांगी।

ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी ने रिकॉर्ड देखकर कहा, "आपकी पत्नी का शव तो कल रात ही अंतिम संस्कार के लिए परिवार को सौंप दिया गया था।"

विवान चौंक गया। "क्या?"

"हां।"

विवान ने तुरंत पूछा, "लेकिन... उसका फोन?"

कर्मचारी ने कहा, "फोन तो दुर्घटना वाली जगह से मिला था। पुलिस के पास जमा है।"

विवान के पैरों तले जमीन खिसक गई।

THE UNANSWERED QUESTION

अगर फोन पुलिस के पास था... तो रात को कॉल किसने की थी?

वह तुरंत पुलिस स्टेशन पहुंचा। पुलिस अधिकारी ने काव्या का फोन दिखाया। फोन बंद था और उसकी बैटरी भी निकाल दी गई थी।

विवान ने अपना फोन निकाला। कॉल हिस्ट्री में रात की कॉल अभी भी मौजूद थी।

CALL HISTORY
02:03 AM — KAVYA

अधिकारी ने नंबर देखकर कहा, "यह नंबर तो आपकी पत्नी का ही है।"

विवान के पास कोई जवाब नहीं था।

CHAPTER 03

शव-साधना

उसी शाम वह गांव के पुराने मंदिर में रहने वाले पंडित हरिदत्त के पास पहुंचा। हरिदत्त ने उसकी बात ध्यान से सुनी और फिर बोले, "मृत व्यक्ति की आवाज सुनाई दे सकती है। लेकिन हर आवाज मृत व्यक्ति की नहीं होती।"

विवान ने पूछा, "तो फिर कौन था?"

पंडित ने उसकी तरफ देखा। "तुम्हारी पत्नी की मृत्यु अचानक हुई। ऐसी मौत के बाद आत्मा कुछ समय तक उस जगह से जुड़ी रह सकती है जहां उसका जीवन अचानक खत्म हुआ।"

विवान ने बेचैनी से पूछा, "क्या मैं उसे वापस ला सकता हूं?"

पंडित का चेहरा गंभीर हो गया। "नहीं।"

"कोई रास्ता नहीं?"

"मृत्यु के बाद लौटने का रास्ता इंसान के लिए नहीं है।"

विवान ने कहा, "अगर मैं कुछ भी करने को तैयार हूं तो?"

“यही तुम्हारी सबसे बड़ी गलती होगी।”

लेकिन विवान नहीं माना। वह वहां से निकल गया।

मंदिर से कुछ दूर एक युवक उसका इंतजार कर रहा था। उसका नाम रुद्र था।

उसने विवान से कहा, "अगर तुम्हें सच में अपनी पत्नी को वापस लाना है, तो एक रास्ता है।"

विवान तुरंत उसकी तरफ मुड़ा। "कौन सा?"

THE FORBIDDEN RITUAL

शव-साधना

विवान चुप रहा।

रुद्र ने आगे कहा, "यह साधारण साधना नहीं है। इसमें मृत शरीर को माध्यम बनाया जाता है। कहा जाता है कि अगर साधना सफल हो जाए तो आत्मा वापस शरीर में प्रवेश कर सकती है।"

विवान ने पूछा, "तो काव्या वापस आ सकती है?"

रुद्र ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, "शायद।"

"और अगर असफल हुई?"

रुद्र कुछ सेकंड चुप रहा।

“तब जो आएगा... जरूरी नहीं कि वह वही हो जिसे तुम बुला रहे हो।”

विवान ने फिर भी हामी भर दी। उसके लिए डर से ज्यादा बड़ा था अपना खोया हुआ प्यार।

रुद्र ने उसे कुछ पुरानी किताबें दीं और चेतावनी दी, "सावधान रहना। साधना के बीच में अगर कोई तुम्हें तुम्हारे नाम से पुकारे... जवाब मत देना।"

विवान ने पूछा, "क्यों?"

रुद्र ने कहा, "क्योंकि उस समय जो आवाज तुम्हें बुलाएगी... वह इंसान की आवाज नहीं होगी।"

उस रात विवान ने काव्या की तस्वीर सामने रखी।

"मैं तुम्हें वापस लाऊंगा।"

उसने फैसला कर लिया था। चाहे इसके लिए उसे मौत की सीमा ही क्यों न पार करनी पड़े।

मौत के बाद लौटने वाली लड़की शव साधना

वह रात जब विवान ने मृत्यु की सीमा पार करने की कोशिश की।

CHAPTER 04

जो वापस आया

आधी रात के बाद विवान पुराने श्मशान घाट पहुंचा। आसमान पर बादल छाए हुए थे। हवा में राख और गीली मिट्टी की गंध थी। दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनाई दे रही थी।

विवान के साथ काव्या का शव था। उसने चारों तरफ देखा। श्मशान में कोई नहीं था।

उसने किताब में बताए अनुसार जमीन पर एक गोल घेरा बनाया और काव्या के शरीर को उसके बीच में रख दिया। उसके सामने काव्या का चेहरा था—वही चेहरा जिसे उसने पहली बार शादी के दिन देखा था और वही चेहरा जिसे उसने आखिरी बार अस्पताल में देखा था।

विवान की आंखों से आंसू बहने लगे।

"काव्या... अगर तुम मुझे सुन सकती हो तो वापस आ जाओ।"

उसने मंत्र पढ़ना शुरू किया।

पहले कुछ नहीं हुआ। हवा शांत हो गई। मोमबत्ती की लौ स्थिर हो गई।

फूssss...

सारी मोमबत्तियां एक साथ बुझ गईं।

विवान के शरीर में ठंड दौड़ गई।

उसने फिर आग जलाई। इस बार उसे अपने पीछे किसी के चलने की आवाज सुनाई दी।

ठक... ठक... ठक...

वह पीछे मुड़ना चाहता था, लेकिन किताब की बात याद थी। उसे साधना नहीं रोकनी थी।

उसने आंखें बंद कीं और मंत्र पढ़ता रहा।

तभी काव्या की उंगलियां हिलीं।

विवान की सांस रुक गई।

उसने आंखें खोलीं। काव्या का शरीर स्थिर था।

फिर उसकी उंगलियां दोबारा हिलीं। इस बार ज्यादा तेज।

अचानक उसके शरीर ने एक झटका लिया।

विवान पीछे हट गया।

काव्या का सिर धीरे-धीरे ऊपर उठा। उसकी आंखें बंद थीं।

फिर...

THE RETURN

उसकी आंखें खुल गईं।

लेकिन आंखों में कोई पुतली नहीं थी। सिर्फ गहरा काला रंग।

विवान की आंखों से आंसू बहने लगे।

"काव्या?"

वह उसके पास गया। काव्या ने धीरे-धीरे सिर घुमाया और मुस्कुराई।

"विवान..."

वह आवाज बिल्कुल काव्या की थी।

विवान ने उसका हाथ पकड़ लिया।

"तुम वापस आ गई!"

काव्या ने कोई जवाब नहीं दिया। बस उसे देखती रही।

फिर अचानक उसके मुंह से काला तरल बाहर निकलने लगा।

विवान पीछे हट गया।

काव्या का शरीर अजीब तरह से कांपने लगा। उसकी गर्दन एक तरफ झुक गई और उसकी आवाज बदल गई।

“तुमने मुझे क्यों बुलाया?”

विवान का चेहरा सफेद पड़ गया।

"काव्या?"

वह जोर से हंसने लगी।

"काव्या..."

फिर उसने धीरे से कहा—

“वो तो जा चुकी है।”

विवान पीछे हट गया।

लेकिन अगले ही पल वही चेहरा फिर सामान्य हो गया।

काव्या रोने लगी।

"विवान... मुझे यहां से ले चलो।"

विवान का दिल फिर पिघल गया। उसने सोचा शायद साधना सफल हो गई है।

उसने काव्या को उठाया और कार में बैठा लिया।

उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वह जिस चीज को घर लेकर जा रहा है...

वह काव्या नहीं थी।

CHAPTER 05

घर में लौट आई चीज़

अगली सुबह विवान की मां उससे मिलने घर पहुंची। दरवाजा खोलते ही उन्हें अजीब बदबू महसूस हुई।

"बेटा, घर में इतनी बदबू क्यों है?"

विवान ने जल्दी से खिड़की खोल दी।

"कुछ नहीं मां।"

मां ने पूछा, "काव्या कहां है?"

विवान कुछ सेकंड चुप रहा। फिर बोला, "वो आराम कर रही है।"

मां ने ऊपर कमरे की तरफ देखा।

"मैं उससे मिल लूं?"

विवान ने तुरंत रोक दिया।

"अभी नहीं।"

मां को कुछ समझ नहीं आया।

लेकिन उसी रात उन्हें ऊपर से किसी के चलने की आवाज सुनाई दी।

ठक... ठक... ठक...

फिर कुछ गिरने की आवाज आई।

मां ने विवान से पूछा, "ऊपर कौन है?"

विवान ने कोई जवाब नहीं दिया।

उस रात करीब तीन बजे उसकी नींद खुली। कमरे की छत की तरफ देखा तो उसका खून जम गया।

काव्या छत से चिपकी हुई थी।

उसके बाल नीचे लटक रहे थे। उसका शरीर उल्टी दिशा में मुड़ा हुआ था।

विवान की चीख निकलते-निकलते रह गई।

"काव्या..."

वह धीरे-धीरे नीचे उतरने लगी। उसके पैर जमीन पर पड़े।

फिर उसने सिर उठाकर विवान को देखा।

“तुम जाग गए?”

उसकी आवाज सामान्य थी।

विवान ने खुद को समझाया कि शायद वह सपना देख रहा था।

लेकिन अगली सुबह रसोई में उसे खून के निशान मिले। फर्श पर एक मरा हुआ जानवर पड़ा था।

और कमरे के कोने में काव्या बैठी थी। वह उसे देख रही थी।

"मुझे भूख लगी है।"

विवान ने डरते हुए पूछा, "क्या चाहिए?"

उसने मुस्कुराकर कहा—

“कच्चा मांस।”

विवान के हाथ से गिलास गिर गया।

अगले कुछ दिनों में घर का माहौल बदल गया।

काव्या दिन में बिल्कुल सामान्य रहती। वह विवान से प्यार से बात करती। उसे उनके पुराने दिन याद थे। उसे उनकी पहली मुलाकात याद थी। उसे शादी की हर बात याद थी।

लेकिन रात होते ही उसका व्यवहार बदल जाता।

कभी वह घंटों छत पर बैठी रहती। कभी खाली कमरे में किसी से बातें करती। कभी दीवार को देखकर हंसती।

और कभी...

आईने के सामने खड़ी होकर खुद को घूरती रहती।

एक रात विवान ने उसे आईने के सामने देखा।

आईने में काव्या का चेहरा नहीं था।

वहां एक विकृत चेहरा दिखाई दे रहा था—आंखें असामान्य रूप से बड़ी, मुंह लंबा और त्वचा जगह-जगह फटी हुई।

और उसके पीछे...

कई काली परछाइयां खड़ी थीं।

विवान डरकर पीछे हट गया।

आईने में उसका चेहरा फिर सामान्य हो गया।

काव्या ने धीरे से उसकी तरफ देखा।

"क्या हुआ?"

विवान कुछ नहीं बोला।

उस रात उसने पहली बार काव्या के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया।

सुबह दरवाजा खोला तो कमरे की दीवार पर काले हाथों के निशान बने हुए थे।

MESSAGE FOUND

“एक शरीर... कई भूखें।”

विवान अब समझ चुका था कि कुछ बहुत गलत था।

CHAPTER 06

आखिरी रात

अगली सुबह वह सीधे पंडित हरिदत्त के पास पहुंचा।

"गुरुजी... आपने सही कहा था।"

हरिदत्त ने उसकी तरफ देखा।

“वह तुम्हारी पत्नी नहीं है।”

विवान की आंखों में आंसू आ गए।

"मैंने गलती कर दी।"

पंडित ने कठोर आवाज में कहा, "तुमने मृत्यु के नियम को तोड़ने की कोशिश की। अब जो शक्ति उसके शरीर में आई है, वह हर गुजरते घंटे के साथ मजबूत हो रही है।"

विवान ने पूछा, "उसे कैसे रोका जाए?"

"उसे वहीं वापस भेजना होगा जहां से तुम उसे लाए थे।"

"श्मशान?"

पंडित ने सिर हिलाया।

"हां।"

तभी पीछे खड़ा रुद्र घबराकर बोला, "लेकिन आज रात अमावस्या है।"

THE LAST NIGHT

“हमारे पास आज की रात के बाद कोई मौका नहीं रहेगा।”

तीनों तुरंत विवान के घर पहुंचे।

बाहर से ही घर अंधेरा दिखाई दे रहा था। दरवाजा खुला था। हवा में सड़न की तेज बदबू थी।

दीवारों पर काले हाथों के निशान थे।

हर कमरे से अलग-अलग फुसफुसाहटें आ रही थीं।

रुद्र ने धीरे से कहा—

"यहां सिर्फ एक आत्मा नहीं है।"

विवान ने उसकी तरफ देखा।

"क्या मतलब?"

"शव-साधना ने रास्ता खोल दिया है। कई भटकी हुई शक्तियां इस शरीर में आ चुकी हैं।"

अचानक ऊपर से आवाज आई—

“विवान...”

पंडित ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।

"जवाब मत देना।"

तीनों धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ने लगे।

ऊपर का कमरा खुला था।

काव्या फर्श पर बैठी थी।

उसकी पीठ उनकी तरफ थी। बाल जमीन तक फैले हुए थे। वह बिल्कुल स्थिर बैठी थी।

पंडित ने मंत्र पढ़ना शुरू किया।

काव्या का सिर धीरे-धीरे घूमने लगा।

लेकिन उसका शरीर वहीं था।

गर्दन घूमती रही।

और आखिरकार उसका चेहरा पूरी तरह पीछे की ओर आ गया।

वह मुस्कुराई।

“तुम मुझे वापस भेजने आए हो?”

विवान की आंखों से आंसू निकल आए।

"तुम काव्या नहीं हो।"

वह जोर से हंसने लगी।

"इतने दिनों बाद पहचान पाए?"

उसका शरीर अचानक हवा में उठ गया।

रुद्र ने पवित्र जल उसकी तरफ फेंका।

काव्या जोर से चीखी।

उसके शरीर से काला धुआं निकलने लगा।

कुछ पल के लिए कई चेहरों जैसी आकृतियां धुएं के भीतर दिखाई दीं।

पंडित ने तुरंत एक घेरा बनाया।

"इसे इसके अंदर लाओ!"

तीनों ने बड़ी मुश्किल से काव्या को घेरे के अंदर बांध दिया।

लेकिन तभी उसने विवान की तरफ देखा।

उसकी आंखों में अचानक आंसू आ गए।

"विवान..."

आवाज बदल चुकी थी।

अब वह बिल्कुल काव्या जैसी थी।

"मुझे बचा लो।"

विवान रुक गया।

"काव्या?"

"हां..."

वह रो रही थी।

"मैं सच में काव्या हूं।"

पंडित चिल्लाए—

"उसकी बात मत सुनो!"

काव्या चीखी—

"झूठ बोल रहे हैं!"

विवान असमंजस में पड़ गया।

तभी काव्या ने वही बात कही जो सिर्फ दोनों के बीच थी।

"हमने शादी के बाद पहली रात जो वादा किया था... तुम्हें याद है?"

विवान की आंखें भर आईं।

वह आगे बढ़ने लगा।

पंडित ने उसे रोक लिया।

"यह तुम्हारी यादें पढ़ रही है।"

काव्या का चेहरा अचानक विकृत हो गया।

उसके मुंह से एक साथ कई आवाजें निकलीं—

“विवान...”

“विवान...”

“विवान...”

पूरा घर उन आवाजों से गूंज उठा।

फिर वह अचानक चीखी।

रुद्र और पंडित ने उसे पकड़ लिया।

किसी तरह उसे कार तक ले जाया गया।

लेकिन जैसे ही कार श्मशान के पास पहुंची...

इंजन बंद हो गया।

सड़क पर चारों तरफ घना अंधेरा था।

पंडित ने कहा—

"कोई पीछे मत देखना।"

लेकिन तभी पीछे से हंसी सुनाई दी।

विवान ने अनजाने में शीशे में देखा।

THE MIRROR

पीछली सीट पर दो काव्या बैठी थीं।

एक खिड़की की तरफ देख रही थी।

दूसरी सीधे विवान को देख रही थी।

विवान का शरीर सुन्न हो गया।

दोनों एक साथ मुस्कुराईं।

फिर एक ने कहा—

"बताओ विवान..."

“तुम्हारी असली पत्नी कौन है?”

रुद्र चीख पड़ा।

पंडित ने तुरंत राख उठाकर एक के चेहरे पर फेंकी।

वह आकृति चीखते हुए काले धुएं में बदल गई।

दूसरी काव्या अब अकेली थी।

पंडित ने कहा—

"यही आखिरी मौका है।"

वे उसे श्मशान तक ले गए।

काव्या को चिता पर लिटाया गया।

पंडित ने अंतिम मंत्र शुरू किया।

हवा तेज हो गई। पेड़ बुरी तरह हिलने लगे।

अचानक काव्या ने आंखें खोलीं।

उसकी आंखों में इस बार डर था।

"विवान..."

विवान की आंखों से आंसू बहने लगे।

"मैं सच में काव्या हूं।"

पंडित ने कहा—

"मत सुनो।"

काव्या चीखने लगी।

"विवान! मुझे मत जलाना!"
"मैं जिंदा हूं!"
"मेरा दम घुट रहा है!"
"मुझे बचाओ!"

विवान के हाथ कांपने लगे।

उसने पंडित की तरफ देखा।

"अगर यह सच में काव्या हुई तो?"

पंडित ने उसकी आंखों में देखकर कहा—

“काव्या की आत्मा तुम्हें कभी मृत्यु के नियम तोड़ने के लिए नहीं कहेगी।”

कुछ पल के लिए विवान बिल्कुल शांत रहा।

फिर उसने अपनी पत्नी की तस्वीर निकाली। तस्वीर को देखा और धीरे से कहा—

"मुझे माफ कर देना, काव्या।"

उसने कांपते हाथों से चिता को आग लगा दी।

काव्या की चीख पूरे श्मशान में गूंज उठी।

लेकिन वह चीख धीरे-धीरे बदलने लगी।

पहले एक औरत की आवाज।

फिर कई औरतों की आवाज।

फिर किसी जानवर जैसी आवाज।

और अंत में...

पूर्ण खामोशी।

काली लपटें धीरे-धीरे बुझने लगीं।

पंडित ने आखिरी मंत्र पूरा किया।

हवा शांत हो गई।

रुद्र ने लंबी सांस ली।

विवान जमीन पर बैठ गया। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।

पंडित उसके पास आए।

THE END OF THE RITUAL

“तुम्हारी पत्नी अब मुक्त है।”

विवान ने कुछ नहीं कहा। वह सिर्फ आग को देखता रहा।

कुछ देर बाद उसे लगा जैसे हवा में किसी की हल्की आवाज आई।

"विवान..."

उसने आंखें बंद कर लीं।

इस बार आवाज में डर नहीं था।

सिर्फ शांति थी।

“अब मुझे जाने दो।”

विवान की आंखों से आखिरी आंसू गिरा।

"जाओ..."

"इस बार मैं तुम्हें नहीं रोकूंगा।"

हवा का एक ठंडा झोंका आया।

और फिर सब कुछ शांत हो गया।

THE FINAL WHISPER

सुबह होने तक चिता की आग पूरी तरह बुझ चुकी थी। विवान ने पीछे मुड़कर श्मशान को देखा। उसे पहली बार महसूस हुआ कि प्यार का मतलब हमेशा किसी को अपने पास रखना नहीं होता।

कभी-कभी...

सच्चा प्यार उसे जाने देना भी होता है।

विवान घर लौट आया। काव्या का कमरा उसने बंद नहीं किया। उसकी तस्वीर के सामने एक दीपक जलाया। और पहली बार सात दिनों में उसके चेहरे पर शांति दिखाई दी।

लेकिन जब वह कमरे से बाहर निकलने लगा...

“धन्यवाद...”

विवान ने पीछे मुड़कर देखा। तस्वीर में काव्या पहले की तरह मुस्कुरा रही थी।

कहानी खत्म हो चुकी थी।

या शायद...

मृत्यु के बाद लौटने वाली लड़की की कहानी यहीं से शुरू हुई थी।

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